कानून नियम और विनियमो की पुनःपरख

नागरिक स्वतंत्रता हमारे लोकतांत्रिक गणंराज्य की प्रमुख पहचान है। कानूनों का उद्देश्य स्वतंत्रता को मजबूती देना है, कानून सिर्फ और सिर्फ हमारे संवैधानिक मुल्यों को दर्शाने के लिए होने चाहिए।

कांग्रेस का मानना है कि हम एक अति विधायी और अतिविनियमित देश बन गये है, कई कानूनों नियमों और अधिनियमों ने नागरिक स्वतंत्रता को प्रतिबंधित कर दिया है। नतीजतन नवाचार, जिसकी वजह से उद्यमशीलता में नये प्रयोगों औद्योगिकी के नये प्रयासों पर एक तरह के प्रतिबंध लग गये हैं, जिसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

कांग्रेस सभी नियमों, विनियमों और कानून की व्यापक समीक्षा करेगी और

  1.  आज के संदर्भों के हिसाब से पुराने और बेकार हो चुके कानूनों को खत्म करेगी, जो बेवजह नागरिकों की स्वतंत्रता पर अड़चन डालते हैं।
  2. उन सभी साधनों और प्रक्रिया में संशोधन करके उन्हें संवैधानिक मुल्यों के अनुरूप बनायेंगे।
  3. नागरिकों द्वारा रोजमर्रा के जीवन में पालन किये जाने वाले नियमों, कानूनों और विनियमों की संख्या को कम करेगी ।

कांग्रेस विशेष रूप से वायदा करती है कि

  1. नागरिकों द्वारा सामान्यतः उल्लंघन किये जाने वाले कानूनों को गैर आपराधिक बना कर दीवानी कानूनों के दायरे में लाना।
  2. भारतीय आपराधिक संहिता की धारा 499 को हटा कर मानहानि को एक दिवानी अपराध बनाएंगे।
  3. भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (जो की देशद्रोह के अपराध को परिभाषित करती है) जिसका कि दुरूपयोग हुआ, और बाद में नये कानून बन जाने से उसकी महत्ता भी समाप्त हो गई है उसे खत्म किया जायेगा।
  4. उन कानूनों को संशोधित करेगे जो बिना सुनवाई के व्यक्ति को गिरफ्तार और जेल में डालकर संविधान की आत्मा के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार मानकों सम्मेलनों का भी उल्लघंन करते है।
  5. हिरासत और पूछताछ के दौरान थर्ड-डिग्री तरीको का उपयोग करने और अत्याचार, क्रूरता या आम पुलिस ज्यादतियों के मामलों को रोकने के लिए अत्याचार निरोधक कानून बनायेंगे।
  6. सशस्त्र बलों (विशेष शक्ति) अधिनियम, 1958 में से यौन हिंसा, गायब कर देना तथा यातना के मामलों में प्रतिरक्षा जैसे मुद्दों को हटाया जायेगा ताकि सुरक्षा बलों और नागरिकों के बीच संतुलन बना रहे।
  7. कोई भी जांच एजेंसी जिसके पास-तलाशी लेने, जब्त करने, संलग्न करने, पूछताछ करने और गिरफ्तार करने की शक्तियां है, वह सभी भारतीय दण्ड संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और भारतीय संविधान के अधीन होगें, इसके लिए कांग्रेस कानूनों में आवश्यक संशोधन करेगी।
  8. आपराधिक प्रक्रिया संहिता और संबधित कानूनों को इस सिद्धान्त के तहत संशोधित करना है कि जमानत एक नियम है और जेल अपवाद।
  9. प्रशासनिक स्तर पर कांग्रेस वादा करती है कि
    1. 3 साल या कम की सजा वाले अपराधों में विचाराधीन कैदीयों और हवालातियों, जो 3 महीने या उससे अधिक से जेल में हैं, को तुरन्त रिहा किया जाए।
    2. सभी हवालातियों और विचाराधीन कैदियों, जो 3 से 7 साल के कारावास की सजा भुगतने वाले अपराधियों में जेल में बन्द हैं, और जिन्होनें 6 महीनों से अधिक जेल में बिताए हो, को तुरन्त रिहा किया जाये।
    3. व्यापक जेल सुधार कार्यक्रम को इस सिद्धान्त के साथ शुरू किया जायेगा कि कैदी मानव और कानूनी अधिकारों के सुरक्षा घेरे में रहें, तथा जेल अपराधियों को सुधारने की संस्था है।
  • काम

    रोजगार और विकास

  • दाम

    सबके हितार्थ अर्थव्यवस्था

  • शान

    हमारी दूरदर्शिता और ढृढ़शक्ति पर गर्व

  • सम्मान

    सभी के लिये सम्मानजनक जीवन

  • सुशासन

    स्वतंत्र और जवाबदेह संस्थानों की मदद से

  • स्वाभिमान

    वंचितों का आत्मसम्मान