संघवाद और केन्द्र राज्य संबन्ध

संघवाद भारतीय संविधान की मूल विशेषता और आधारभूत सिद्धान्त है। पिछले 5 वर्षों में भारतीय संविधान की आत्मा और केन्द्र राज्य संबंधों को कुचल कर रख दिया है। कांग्रेस का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश को सिर्फ केन्द्र सरकार द्वारा संचालित नहीं किया जा सकता है। आम लोगों के दैनिक जीवन के कई मुद्दे है जिनका हल राज्य सरकार (जो कि लोगों के ज्यादा नजदीक हैं) तथा कुल मामलों में स्थानीय सरकार/निकाय (पंचायत या नगर पालिका) के द्वारा आसानी से समझा और हल किया जा सकता है।

  1. हम संविधान की सातवीं अनुसूची की समीक्षा करेंगे तथा कुछ विधायी क्षेत्रों को समवर्ती सूची 3 से हटाकर सूची 2 में हस्तांतरित करने के लिए आम सहमति बनायेंगे।
  2. हम केन्द्र सरकार के उन मंत्रालयों और विभागों के आकार को कम करेंगे, जिन क्षेत्रों में राज्य सरकारों ने पर्याप्त क्षमता प्राप्त कर ली है।
  3. कांग्रेस राज्य सरकारों को स्कूली शिक्षा प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा बाल पोषण में कार्य करने में प्रधानता देगी और यह सुनिश्चित करेगी कि इन विषयों के क्रियान्वयन में केन्द्र सरकार एक सहायक और सहयोगी की भूमिका निभाती रहे।
  4. कांग्रेस जी.एस.टी. पर मंत्रीपरिषद् समिति के साथ-साथ कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी मंत्रियों की समिति बनाने के विचार पर अमल करने का वायदा करती है।
  5. हम पंद्रहवें वित्त आयोग की स्थापना करेंगे तथा राज्यों से आग्रह करेंगे कि वे भी अपने राज्यों में राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करें।
  6. संविधान का 73वां और 74वां संशोधन कांग्रेस सरकार की देन है, हम राज्य सरकारों को कहेंगे कि वे इन संविधान संशोधन के मूलस्वरूप, आत्मा और भावना के अनुसार स्थानीय निकायों नगरपालिका तथा ग्राम पंचायतो को कार्य, शक्तियां तथा धन आंवटित करें।
  7. हम जी.एस.टी., राजस्व के हिस्से सहित पंचायतो और नगरपालिकाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए, राज्य सरकारों के साथ मिलकर, कार्य करेंगे। हमने जैसा कि 1988-89 में स्वर्गीय राजीव गांधी जी के शासन काल में सफलतापूर्वक किया गया था पंचायतों और नगरपालिकाओं को केन्द्र सरकार की तरफ से सीधा धन आवंटन की संभावना तलाशेंगे।
  8. कांग्रेस पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि और एकीकृत कार्य योजना जिसे कि यूपीए सरकार के समय क्रियान्वित करके बेहतरीन परिणाम हासिल किये गये थे, की समीक्षा करते हुए उन्हें दोबारा लागू किया जायेगा।
  9. उत्तरपूर्व राज्यों का देश में एक महत्वपूर्ण स्थान है और उसी के मद्देनजर संविधान में विशेष प्रावधान किये गये हैं। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कांग्रेस वायदा करती है कि
  10. पूर्वोत्तर राज्यों की विशेष श्रेणी वाली स्थिति बहाल रहेगी।
  11. कुख्यात नागरिक संशोधन विधेयक, जिसके लिए पूर्वोत्तर राज्यों में भारी आक्रोश है, को वापस ले लिया जायेगा।
  12. पूर्वोत्तर राज्यों के भीतर स्वायत्त जिला परिषदों के महत्व के मद्देनजर वित्तीय सहायता को बढ़ाया जायेंगा।
  13. तत्त्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा राज्य सभा में दिनांक 20 फरवरी, 2014 को की गयी घोषणा के अनुरूप आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिया जायेगा।
  14. कांग्रेस पुद्दुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देगी।
  15. कांग्रेस राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम 1991 में संशोधन करते हुए स्पष्ट व्याख्या करेगी कि उप-राज्यपाल तीन आरक्षित विषयों को छोड़कर अन्य सभी में मंत्रीपरिषद् की सलाह पर कार्य करेंगे।
  16. कांग्रेस अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्ष्यद्वीप और दमनदीव तथा दादरा और नगर हवेली केन्द्र शासित प्रदेशों में राज्यपाल को सलाह के लिए स्वायत्त शाही परिषद् का गठन का वायदा करती है।
  • काम

    रोजगार और विकास

  • दाम

    सबके हितार्थ अर्थव्यवस्था

  • शान

    हमारी दूरदर्शिता और ढृढ़शक्ति पर गर्व

  • सम्मान

    सभी के लिये सम्मानजनक जीवन

  • सुशासन

    स्वतंत्र और जवाबदेह संस्थानों की मदद से

  • स्वाभिमान

    वंचितों का आत्मसम्मान