कृषि, किसान और कृषि श्रमिक

प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि “सब कुछ इन्तजार कर सकता है पर कृषि नहीं”।

लेकिन, पिछले पांच वर्षों के भाजपा राज में कृषि क्षेत्र गहरे संकट में चला गया है। पिछले चार साल में उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं दिया गया, फसल खरीद केन्द्र या तो थे ही नहीं या वहाँ पर पूरी तरह से खरीद हुई ही नहीं है, किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता चला गया, कृषि लागत लगातार बढ़ती गई, कृषि ऋण सुविधा अनुपलब्ध थी या अपर्याप्त थी, नोटबन्दी ने नकद आधारित कृषि व्यवस्था को झकझोर दिया है, सहकारी ऋण समितियों तथा सहकारी बैंकों ने किसानों की जमापूंजी को सहकारी ऋण में परिवर्तित करने के अधिकार से किसानों को वंचित कर दिया, ज्यादातर व्यापार की शर्तें कृषि क्षेत्र के खिलाफ थी, फसल बीमा योजना ने किसानों को लूटकर बीमा कंपनियों की जेब भरी, किसानों और खेतिहर मजदूरों को सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिली। कांग्रेस किसानों के दर्द को समझती और महसूस करती है।

  1. अपने चुनाव वायदे के अनुसार छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनने के तुरंत बाद किसानों का कर्ज माफ किया गया। कांग्रेस अन्य राज्यों में भी कृषि ऋण माफ करने का वायदा करती है।
  2. हम सिर्फ कर्ज माफी करके ही अपने जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ेंगे, बल्कि उचित मूल्य, कृषि में कम लागत, बैंकों से ऋण सुविधा के द्वारा हम किसानों को कर्ज मुक्ति अर्थात Freedom From Indebtedness की तरफ ले जाने का वायदा करते हैं।
  3. कृषि ऋण एक दीवानी (सिविल) मामला है, हम, किसी भी किसान, जो कृषि ऋण चुकाने में असमर्थ है, के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही करने की अनुमति नहीं देंगे।
  4. कृषि क्षेत्र को विशेष महत्व देते हुए हम अलग से किसान बजट प्रस्तुत करेंगे।
  5. कांग्रेस कृषि क्षेत्र के विकास की योजनाओं और कार्यक्रम को बनाने के लिए एक स्थाई राष्ट्रीय आयोग कृषि विकास और योजना आयोगकी स्थापना करेगी, जिसमें किसान, कृषि वैज्ञानिक और कृषि अर्थशास्त्री सम्मलित होंगे, यह आयोग सरकार को सलाह देगा कि कैसे कृषि को व्यवहार्य, प्रतिस्पर्धी और फायदेमन्द बनाया जा सकता है। सामान्यतः आयोग की सिफारिशें मानने के लिए सरकार बाध्य होगी। यह आयोग कृषि लागत और मूल्य आयोग का स्थान लेगा।
  6. कांग्रेस कृषि श्रमिकों और सीमान्त किसानोंके लिए बनने वाली नीतियों और कार्यक्रम के लिए सलाह देने हेतु एक आयोग स्थापित करेगी, यह आयोग मज़दूरी दर में वृद्धि के साथ बागवानी, फूलों की खेती, डेयरी और मुर्गीपालन जैसे सहायक कृषि कार्यों के लिए नीतियां ओर कार्यक्रम बनाने मे सलाह देगा और सहयोग करेगा।
  7. हम भाजपा सरकार की असफल कृषि बीमा योजना को पूरी तरह से बदल देंगे। जिसने किसानों की कीमत पर, बीमा कंपनियों की जेब भरी है तथा बीमा कंपनियों को निर्देशित करेंगे कि वो न लाभ न हानि(No Profit - No Loss) के सिद्धान्त को अपनाते हुए फसल बीमा उपलब्ध करवाये तथा उसी के आधार पर किस्त लें।
  8. कांग्रेस राज्य सरकारों के सहयोग से भूमि स्वामित्व और भूमि किरायेदारी के रिकार्ड का डिजिटाइजेसन (अंकरूपण) करेगी, और विशेषकर महिला कृषकों के स्वामित्व और किरायेदारी के अधिकार को स्थापित करते हुए यह सुनिश्चत करेगी कि महिलाओं को कृषि संबधित योजनाओं का लाभ मिले।
  9. कृषि कार्यों हेतु तकनीकी निवेश और बाज़ार उपलब्ध करवाने के लिए कांग्रेस उत्पादक कंपनियों ओर किसान संगठनों के निर्माण के लिए किसानों को प्रोत्साहित करेगी।
  10. हम कृषि लागत की समीक्षा करेंगे और जहाँ आवश्यक हुआ वहां सब्सिडी देंगे तथा साथ ही साथ हम कृषि कार्य हेतु मशीनरी किराये पर लेने की सुविधा स्थापित करेंगे।
  11. कांग्रेस कृषि उपज मंडी समितियों के अधिनियम में संशोधन करेगी, जिससे कि कृषि उपज के निर्यात और अंतर्राज्यीय व्यापार पर लगे सभी प्रतिबन्ध समाप्त हो जायें।
  12. हम बड़े गांवों और छोटे कस्बों में पर्याप्त बुनियादी ढ़ांचे के साथ में किसान बाजार की स्थापना करेंगे, जहाँ पर किसान बिना किसी प्रतिबन्ध के अपनी उपज बेच सकें।
  13. कांग्रेस कृषि उत्पादों के आयात और निर्यात के लिए नीति बनाएगी, जो किसानों और किसान उत्पादक समूहों/कंपनियों को उनकी आय वृद्धि के लिए सहायता करेगी।
  14. कांग्रेस देश के प्रत्येक ब्लॉक में आधुनिक गोदाम, कोल्ड स्टोर तथा खाद्य प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए नीतियां बनायेगी।
  15. हम एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सर्विसेज की पुरानी प्रथा को पुनर्जीवित करके और अधिक मजबूत ओर बेहतर बनायेगें तथा कृषि क्षेत्र में सर्वोत्तम ज्ञान और कार्यप्रणाली को लागू करेंगे।
  16. कांग्रेस पी.डी.एस., आई.सी.डी.एस. और मध्याह्न भोजन के लिए खरीदे जा सकने वाले, तथा स्थानीय स्तर पर उपजने वाले मोटे अनाजों और दालों को उगाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
  17. कांग्रेस कृषि विविधिकरण द्वारा किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए बागवानी, मछलीपालन और रेशम कीटपालन के लिए एक बड़े कार्यक्रम को प्रोत्साहित करने का वायदा करती है। हम देश में डेयरी और पॉल्ट्री उत्पादों को दोगुना करने के लिए एक राष्ट्रीय परियोजना की शुरूआत करेंगे।
  18. कांग्रेस जैविक खेती को बढ़ावा देगी, किसानों को मिश्रित उर्वरक और कीटनाशकों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहन देगी तथा जैविक उत्पादों के सत्यापन में सहायता करके उचित मूल्य उपलब्ध करवाने का वायदा करती है।
  19. कांग्रेस कृषि सम्बन्धित अध्यापन, अनुसंधान और विकास, कृषि सम्बधी मौलिक विज्ञान, व प्रायोगिक विज्ञान और तकनीकी के लिए आवंटित धन को अगले पांच साल में दोगुना करेगी, हम देश के प्रत्येक राजस्व प्रभाग में कृषि विद्यालय और पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय की स्थापना करेंगे।
  20. कांग्रेस वायदा करती है कि भूमि अधिग्रहण, पुर्नवास और पुनर्स्थापना अधिनियम-2013 और वनाधिकार अधिनियम - 2006 के क्रियान्वयन में आई विकृतियों को दूर कर, इन अधिनियमों के मूल उदे्श्यों का बहाल करेंगे।
  21. आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को बदलकर आज की जरूरतों और संदर्भों के हिसाब से नया कानून बनायेंगे जो विशेष आपात परिस्थितियों में ही लागू किया जा सकेगा।
  22. पिछले अनुभवों के आधार पर कांग्रेस मनरेगा को नये सिरे से डिजाइन करेगी ताकि :
    1. जिन जिलों ने 100 दिन के रोजगार के लक्ष्य को पूरा कर लिया है, उनमें रोजगार की गारंटी के दिनों की संख्या बढ़ाकर 150 करेगी।
    2. >मनरेगा श्रम और श्रमिकों का इस्तेमाल जलाशय की मरम्मत और निर्माण तथा बंजर भूमि उत्थान अभियान में किया जायेगा।
    3. ग्रामीण स्तर की सामाजिक सुविधाएं जैसे स्वास्थ्य केन्द्र, कक्षाएं, पुस्तकालय और खेल के मैदानों के निर्माण के लिए मनरेगा का इस्तेमाल किया जायेगा।
  • काम

    रोजगार और विकास

  • दाम

    सबके हितार्थ अर्थव्यवस्था

  • शान

    हमारी दूरदर्शिता और ढृढ़शक्ति पर गर्व

  • सम्मान

    सभी के लिये सम्मानजनक जीवन

  • सुशासन

    स्वतंत्र और जवाबदेह संस्थानों की मदद से

  • स्वाभिमान

    वंचितों का आत्मसम्मान